धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों को समय पर घोषित करने की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने घोषणा की है कि उत्तर पुस्तिकाओं के जांच कार्य को गति देने के लिए 16 अप्रैल 2026 से द्वितीय चरण का स्पॉट इवैल्यूएशन (Spot Evaluation) विधिवत रूप से आरंभ किया जा रहा है। बोर्ड का लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को न केवल पारदर्शी बनाना है, बल्कि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर संपन्न करना भी है।
शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य, लापरवाही की गुंजाइश नहीं
मूल्यांकन प्रक्रिया की गंभीरता को देखते हुए डॉ. शर्मा ने सभी संबंधित शिक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चयनित शिक्षकों को निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों पर अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करनी होगी। डॉ. शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि मूल्यांकन कार्य में अनुशासन और जिम्मेदारी का निर्वहन सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि परिणाम तैयार करने की राह में कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।
जिला उपनिदेशकों को कड़े निर्देश: शिक्षकों की कमी न होने दें
बोर्ड अध्यक्ष ने प्रदेश के सभी जिला उपनिदेशकों (Deputy Directors) को भी सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन विषयों के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है, वहां तत्काल प्रभाव से योग्य शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाए। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि मूल्यांकन केंद्रों पर कार्य की गति धीमी न पड़े और शिक्षकों की उपलब्धता के कारण किसी भी विषय का परिणाम लंबित न रहे।
गुणवत्ता, गोपनीयता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
बोर्ड की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए डॉ. शर्मा ने साझा किया कि इस बार तीन मुख्य स्तंभों—गुणवत्ता (Quality), गोपनीयता (Secrecy) और पारदर्शिता (Transparency)—पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बोर्ड का प्रयास है कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच इस तरह से हो कि छात्रों को उनकी मेहनत का सटीक फल मिले और मूल्यांकन में त्रुटि की कोई संभावना न रहे। समयबद्ध तरीके से मूल्यांकन पूरा होने से छात्रों को आगामी उच्च शिक्षा के सत्र के लिए समय पर परिणाम मिल सकेंगे।
















