पालमपुर, 11 मई 2026: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए जीवन में सफलता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया है।
मेरिट में आना उपलब्धि, पर अच्छा इंसान बनना लक्ष्य
शांता कुमार ने कहा कि समाचार पत्रों में मेरिट में आए छात्रों की मुस्कुराती तस्वीरें देख मन प्रसन्न होता है। कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर तो कोई अध्यापक बनना चाहता है। उन्होंने इन परिश्रमी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए एक महत्वपूर्ण सीख दी— “जीवन में आप जो भी बनना चाहते हैं बनें, लेकिन कुछ भी बनने से पहले एक अच्छा और ईमानदार मनुष्य अवश्य बनें।”
शांता कुमार ने कहा कि समाचार पत्रों में मेरिट में आए छात्रों की मुस्कुराती तस्वीरें देख मन प्रसन्न होता है। कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर तो कोई अध्यापक बनना चाहता है। उन्होंने इन परिश्रमी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए एक महत्वपूर्ण सीख दी— “जीवन में आप जो भी बनना चाहते हैं बनें, लेकिन कुछ भी बनने से पहले एक अच्छा और ईमानदार मनुष्य अवश्य बनें।”
पूजा सिंघल का उदाहरण देकर चेताया
अपने संदेश को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने वर्ष 2000 की आईएएस टॉपर पूजा सिंघल का उदाहरण दिया। शांता कुमार ने बताया कि मात्र 21 साल की उम्र में देश भर में प्रथम आने वाली पूजा सिंघल अत्यंत ‘योग्य’ तो बनीं, लेकिन ‘अच्छी मनुष्य’ नहीं बन पाईं। झारखंड में भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में फंसने के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा।
अपने संदेश को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने वर्ष 2000 की आईएएस टॉपर पूजा सिंघल का उदाहरण दिया। शांता कुमार ने बताया कि मात्र 21 साल की उम्र में देश भर में प्रथम आने वाली पूजा सिंघल अत्यंत ‘योग्य’ तो बनीं, लेकिन ‘अच्छी मनुष्य’ नहीं बन पाईं। झारखंड में भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में फंसने के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा।
उन्होंने कहा, “पूजा सिंघल ने परीक्षा में ऐतिहासिक स्थान प्राप्त किया, लेकिन आज वह जेल और जमानत के चक्रव्यूह में फंसी हैं। यह दर्शाता है कि जीवन में केवल परीक्षा के अंक ही काफी नहीं होते; सबसे महत्वपूर्ण मनुष्य का चरित्र होता है।”
छात्रों को संदेश
शांता कुमार ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी काबिलियत का उपयोग समाज के निर्माण और ईमानदारी के लिए करें, न कि केवल पद और प्रतिष्ठा के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना चरित्र के योग्यता समाज के लिए घातक हो सकती है।
शांता कुमार ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी काबिलियत का उपयोग समाज के निर्माण और ईमानदारी के लिए करें, न कि केवल पद और प्रतिष्ठा के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना चरित्र के योग्यता समाज के लिए घातक हो सकती है।




















