पंजाब की सियासत में उस समय एक बड़ा मोड़ आया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई और उनके बेहद करीबी रहे ज्ञान सिंह मान ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 11 मई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने उन्हें विधिवत पार्टी में शामिल करवाया। ज्ञान सिंह मान के साथ-साथ बरनाला के जाने-माने व्यवसायी बलजिंदर सिंह बरनाला और जलालाबाद के सक्रिय नेता मनजिंदर सिंह साजन खेड़ा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, जिससे ‘आप’ के स्थानीय संगठन को गहरा धक्का लगा है।
इस अवसर पर सुनील जाखड़ ने राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि सरकारी ताकत का दुरुपयोग कर भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके कार्यालयों पर हमले करवाने से ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की जांच को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि वे किसी राजनीतिक दल के दबाव में काम करने के बजाय संविधान और कानून के दायरे में रहकर जनता की सेवा करें, क्योंकि भविष्य में हर गलत कार्य का हिसाब लिया जाएगा।
ज्ञान सिंह मान ने पार्टी छोड़ने के पीछे ‘आप’ के भीतर बढ़ती गुटबाजी, पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और दिल्ली के नेतृत्व के बढ़ते हस्तक्षेप को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि जिस बदलाव की उम्मीद के साथ लोग इस पार्टी से जुड़े थे, वह अब कहीं नजर नहीं आता और पार्टी अब केवल कुछ ‘खास’ लोगों तक सीमित होकर रह गई है। चूंकि ज्ञान सिंह मान लंबे समय से संगरूर और धुरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के राजनीतिक कार्यों को संभाल रहे थे, इसलिए उनका भाजपा में जाना आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के लिए एक बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जा रही है।





















