कांगड़ा जिला में चल रहे 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के पहले 50 दिनों में स्वास्थ्य विभाग ने बेहतरीन सफलता हासिल की है। धर्मशाला में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अभियान के तहत जिले के उच्च जोखिम वाले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग और आउटरीच गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
विभाग अब तक जिला भर में 126 आयुष्मान आरोग्य शिविरों का सफल आयोजन कर चुका है। इन शिविरों के माध्यम से कुल 956 लक्षित संवेदनशील क्षेत्रों में से 126 उच्च जोखिम वाले इलाकों को कवर किया गया है। सक्रिय टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान के लिए अब तक शिविरों में 7,475 चेस्ट एक्स-रे किए गए हैं। इसके अलावा, विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में स्थापित मशीनों के जरिए 10,587 अतिरिक्त चेस्ट एक्स-रे भी किए गए हैं। इस पूरे अभियान का मुख्य लक्ष्य कांगड़ा जिले की लगभग 5.88 लाख संवेदनशील आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
इस स्वास्थ्य अभियान में समुदाय और विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है, जहां स्क्रीनिंग करवाने वालों में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं। ब्लॉक स्तर के प्रदर्शन को देखें तो डाडासिबा में सबसे अधिक शिविर आयोजित किए गए हैं, जिसके बाद इंदौरा और फतेहपुर का स्थान आता है। जिला स्तर पर प्रति शिविर औसतन 62 लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो जनता के बीच बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक करोल ने इसे एक जन आंदोलन बताते हुए कहा कि लगातार स्क्रीनिंग और समय पर जांच से टीबी का सटीक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।




















