न्यू दिल्ली :केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कृषि अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बायो-बिटुमेन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने बताया कि कृषि अवशेषों से तैयार यह सामग्री पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को घटाने में सहायक है और चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है। बायो-बिटुमेन के 15 प्रतिशत उपयोग से देश को लगभग 4,500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है तथा आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
सड़क अवसंरचना क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
“कृषि अवशेषों से सड़क निर्माण तक” विषय पर आयोजित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि यह दिन देश के सड़क अवसंरचना क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि भारत व्यावसायिक स्तर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिक समुदाय के प्रयासों की सराहना की और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
उन्होंने कहा कि यह नवाचार किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए साधन विकसित करेगा और समग्र रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा।
सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
मंत्री ने बायो-बिटुमेन को सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण-अनुकूल प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य की दिशा में देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।





















