धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने हिमाचल दिवस के गरिमामयी अवसर पर प्रदेश की जनता, विशेषकर शिक्षा जगत से जुड़े विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने प्रदेश की प्रगति पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल ने शिक्षा के क्षेत्र में जो मुकाम हासिल किया है, वह शिक्षकों के निस्वार्थ समर्पण और छात्र-छात्राओं के अथक परिश्रम का ही सुखद परिणाम है। डॉ. शर्मा ने शिक्षा को किसी भी सभ्य समाज और प्रगतिशील राज्य की रीढ़ बताया और युवाओं को अनुशासन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रटने की पुरानी पद्धति को जड़ से खत्म कर व्यावहारिक और अवधारणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी विषयों की गहराई को समझेंगे, तभी वे वास्तविक अर्थों में शिक्षित कहलाएंगे। उन्होंने शिक्षकों से भी शिक्षण कार्य को अधिक रोचक और गतिविधियों पर आधारित बनाने का आग्रह किया ताकि बच्चों में विश्लेषणात्मक सोच, नवाचार और जटिल समस्याओं को सुलझाने की क्षमता विकसित हो सके।
इसके साथ ही, डॉ. शर्मा ने समाज की एक गंभीर चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए युवाओं से नशे जैसी घातक बुराइयों से दूर रहने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और जागरूक हिमाचल के निर्माण के लिए युवाओं का स्वस्थ और चरित्रवान होना अनिवार्य है। बोर्ड अध्यक्ष ने अंत में भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक पारदर्शी, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य के हर कोने में विद्यार्थियों को बेहतरीन शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

















