पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए राज्य की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल विकास के मामले में पिछड़ गया है और जनता को केवल भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा है। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में एक “सिंडिकेट” व्यवस्था हावी है, जिसने आम लोगों के विश्वास को तोड़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल नारों से विकास संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ठोस नीतियों और जिम्मेदार शासन की जरूरत होती है। उन्होंने कांग्रेस को देश की एकमात्र ऐसी विचारधारा बताया, जो सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करती है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र को मजबूत करने और राज्य के भविष्य को संवारने के लिए कांग्रेस का सशक्त होना बेहद जरूरी है।
सुक्खू ने यह भी बताया कि करीब 20 वर्षों बाद कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जो इंसानियत और समावेशी सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर राज्य में विकास कार्यों को तेज गति दी जाएगी। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव किया और कोई नया प्रोजेक्ट नहीं दिया, जबकि वर्तमान में चल रहे अधिकतर प्रोजेक्ट कांग्रेस शासनकाल में शुरू किए गए थे।
मनरेगा योजना को लेकर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह योजना सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सोच का परिणाम थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसकी “आत्मा” को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार, पहले यह योजना मांग आधारित थी, जबकि अब इसे आवंटन आधारित बना दिया गया है, जिससे लाखों लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है।
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सुक्खू ने कांग्रेस को महिलाओं का वास्तविक संरक्षक बताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण दिलाने का काम किया था। उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी दलों ने इस “साजिश” को नाकाम कर दिया।
अपने संबोधन में सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने वहां जनता से किए गए वादों को पूरा किया है और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपने अंतिम छह महीनों में भारी वित्तीय बोझ डालते हुए “रेवड़ियां” बांटी, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हिमाचल के विकास कार्यों में बाधा डालने का भी आरोप लगाया।















