सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार की एक्साइज नीति पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक्साइज विभाग को “प्रयोगशाला” बना रखा है, जहां बिना दूरदर्शिता और वास्तविक ज़मीनी स्थिति समझे लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। शर्मा ने कहा कि पहले शराब नीति में अचानक बदलाव के कारण ठेके नीलाम नहीं हो पाए और बाद में सरकार द्वारा ठेके खुद चलाने का प्रयास भी विफल रहा। इस विफलता के कारण ठेकों की सुरक्षा के लिए होमगार्ड्स तैनात करने की नौबत आई, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि अगले वित्तीय वर्ष से लागू की जा रही ई-टेंडरिंग नीति स्थानीय लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। उनका कहना था कि ऑनलाइन टेंडर कहीं से भी लिया जा सकता है, जिससे ठेके प्रदेश के बाहर के लोगों के हाथों में चले जा सकते हैं और स्थानीय लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इससे ठेकेदारों के साथ-साथ उनके कर्मचारी, छोटे व्यापारी और परिवार भी प्रभावित होंगे।
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सुधीर शर्मा ने पंजाब में ई-टेंडरिंग के असफल अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार वही मॉडल लागू करने जा रही है, जो पहले विफल साबित हो चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिरमौर और सोलन की शराब फैक्ट्रियों पर कार्रवाई को कमजोर करने और मामले को दबाने के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कई लोग सक्रिय रहे। विधायक ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल अपने मित्रों और समर्थकों के हित की रक्षा में लगी हुई है और जनता के भविष्य की चिंता नहीं कर रही। उन्होंने सरकार से तुरंत एक्साइज नीति पर पुनर्विचार करने और स्थानीय लोगों तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी।





















