28 अप्रैल का दिन भारत के लिए वीरता और संघर्ष की अटूट गाथाओं का साक्षी रहा है। आज ही के दिन 1858 में स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा जोधा सिंह अटैया ने अपने 51 साथियों के साथ मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। कर्नल क्रस्टाइज की धोखेबाज घेराबंदी के बाद इन सभी 52 क्रांतिकारियों को फतेहपुर के ‘बावनी इमली’ पेड़ पर एक साथ फांसी दे दी गई, जो भारतीय इतिहास के सबसे हृदयविदारक और प्रेरक अध्यायों में दर्ज है।
राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के नजरिए से भी यह तारीख अत्यंत महत्वपूर्ण है। 1916 में इसी दिन लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने बेलगाम में ‘इंडियन होमरूल लीग’ की स्थापना कर स्वशासन के संकल्प को नई दिशा दी थी। साथ ही, 1848 में आज ही के दिन आधुनिक ओड़िशा के सूत्रधार और प्रखर सुधारक मधुसूदन दास का जन्म हुआ, जिन्होंने समाज निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। हालिया इतिहास की बात करें तो, 2020 और 2021 के दौरान इसी समय भारत कोरोना की भीषण लहर से जूझ रहा था, जिसने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति नई जागरूकता पैदा की।


















