सीएमओ डॉ विवेक करोल ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ के अंतर्गत सेन्ट्रल टीबी डिवीजन द्वारा 969 उच्च जोखिम गांवो की पहचान की गई है। जिसमें 345257 उच्च जोखिम आबादी की पहचान करके स्क्रीनिंग की जा चुकी है जिनमें से 153259 लोगो के एक्स-रे किए जा चुके हैं । सीएमओ ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ के तहत अब लापता मामलों की पहचान, टीबी से होने वाली मौतों में कमी और नए मामलों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए बुजुर्गों, कुपोषित लोगों, मधुमेह रोगियों, धूम्रपान करने वालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट का दायरा बढ़ाकर संक्रमण की श्रृंखला को तोडऩे का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी (किसी भी अवधि की), बलगम में खून आना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी व थकान तथा गर्दन या अन्य स्थानों पर गांठें शामिल हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए। साथ ही, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और टीबी उन्मूलन में सहयोग करें।
सीएमओ ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ के तहत अब लापता मामलों की पहचान, टीबी से होने वाली मौतों में कमी और नए मामलों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए बुजुर्गों, कुपोषित लोगों, मधुमेह रोगियों, धूम्रपान करने वालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट का दायरा बढ़ाकर संक्रमण की श्रृंखला को तोडऩे का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी (किसी भी अवधि की), बलगम में खून आना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी व थकान तथा गर्दन या अन्य स्थानों पर गांठें शामिल हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए। साथ ही, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और टीबी उन्मूलन में सहयोग करें।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सूद ने कहा कि हम आधुनिक तकनीकों जैसे पोर्टेबल एक्स-रे और एनएएटी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जांच तेजी से हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान टीबी जागरूकता में योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। टीबी चैंपियनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही इलाज और पोषण से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनसहयोग और समय पर जांच से ही टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम के दौरान विनय शर्मा, उपप्रमुख निदेशक, कांगड़ा,पंकज कुमार एसी (एफ एंड ए),विजय कुमार, निदेशक कांगड़ा, नवनीत शर्मा सम्पादक दैनिक जागरण ,सीयू हिमाचल प्रदेश, शैलजा, जिला खनन अधिकारी ,निक्षय मित्रों- मंदिर आयुक्त, कांगड़ा सत्य सै सेवा संगठन, कांगड़ा संत निरंकारी मंडल, दिल्ली जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, कांगड़ा, धर्मशाला , छवि कश्यप, नगरोटा बागवान , जिला प्रबंधक, बैंक, धर्मशाला
सत्य सै सेवा संगठन, कांगड़ा शेष भूषण जोन समन्वयक, सुनील देव, राज्य प्रभारी, निक्षय मित्र, रोशन रैना, जिला अध्यक्ष, कांगड़ा (पूर्वी), विनोद गुप्ता, जिला अध्यक्ष, कांगड़ा (पश्चिम), अनुराग सूद, जिला अध्यक्ष, कांगड़ा (दक्षिण)संत निरंकारी मिशन से तिलक राज डोगरा, रूपा गुरंग, श्री केवल राम , संत. स.ल. अवस्थी, सत्यम महिला रथ एमआर. अंतरिक्ष डोगरा, एलटी आईसीटीसी, कंट्रीब्यूशन इन एक्सरे,शिवालिक अवस्थी, आईसीडीएस विभाग, प्रेरणा विश्व प्रेमी, सीएचओ तम्मन्ना ठाकुर,मनीषा राणा, पुष्पलता मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे ।





















