सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। धर्मशाला में पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया बयानों को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के पास न तो कोई ठोस उद्योग नीति है और न ही प्रदेश के औद्योगिक विकास को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण। बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के बजाय मेलों, कार्निवाल और उत्सवों के आयोजन में व्यस्त है, जिन पर भारी धनराशि खर्च की जा रही है, जबकि प्रदेश का उद्योग क्षेत्र लगातार संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया गया था, जिसमें करों में राहत, सब्सिडी, सस्ती बिजली और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं शामिल थीं, जिससे निवेश बढ़ा और युवाओं को रोजगार मिला। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही उन प्रावधानों को कमजोर कर दिया, जिससे उद्योगों का पलायन बढ़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की कि बीते वर्षों में कितने उद्योग बंद हुए और कितने निवेश प्रस्ताव वापस लिए गए।
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बिक्रम ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार स्वावलंबन और स्वरोजगार की योजनाओं की केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर युवाओं को न तो समय पर सब्सिडी मिल रही है और न ही वित्तीय सहायता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब युवाओं को वास्तविक मदद नहीं मिल रही, तो फिर ऐसे भव्य आयोजनों के माध्यम से सरकार किसे आकर्षित करना चाहती है। उन्होंने सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक ओर पंचायत चुनावों को धनाभाव का हवाला देकर टालने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर मेलों और फेस्टिवलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की अनदेखी कर बाहरी कलाकारों पर भारी राशि खर्च की जा रही है, जो हिमाचली संस्कृति और स्थानीय प्रतिभा के साथ अन्याय है। अंत में बिक्रम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को दिखावटी आयोजनों की नहीं, बल्कि एक मजबूत उद्योग नीति, पारदर्शी प्रशासन और रोजगार केंद्रित सोच की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते उद्योग और युवाओं के भविष्य को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो इसके गंभीर परिणाम प्रदेश को भुगतने पड़ेंगे।





















