हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में पर्यटन की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है और बीर जैसा खूबसूरत क्षेत्र तो पूरी तरह से पर्यटन पर ही निर्भर है। पर्यटन न केवल स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करता है, बल्कि यह हिमाचलियों की आय का प्रमुख स्रोत भी है। हालांकि, अनियंत्रित पर्यटन अपने साथ भीड़भाड़, प्लास्टिक कचरा, ड्रग्स और शोर-शराबे वाली रेव पार्टियों जैसी चुनौतियां भी लाता है। कई बड़े आयोजनों ने बड़े वादे तो किए, लेकिन अंततः वे पहाड़ों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा छोड़ गए। ऐसे में आज समय की मांग है कि हम ‘सस्टेनेबल टूरिज्म’ (सतत पर्यटन) और कचरा प्रबंधन पर ध्यान दें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इन पहाड़ों का आनंद ले सकें।
बीर म्यूजिक फेस्टिवल इसी सोच के साथ खड़ा हुआ है जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना है। हम सजावट के लिए बांस, देवदार के फल और पुराने कपड़ों का उपयोग करते हैं। यह भारत का इकलौता ऐसा आयोजन है जो 48 घंटे निरंतर चलता है, जहाँ दिन में कलाकार अपनी मौलिक रचनाएँ प्रस्तुत करते हैं और रात में साउंड हीलिंग, योग और नेचर थेरेपी का आयोजन होता है।
इस महोत्सव में हम स्थानीय हिमाचली और तिब्बती संस्कृति के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों को भी एक बड़ा मंच प्रदान करते हैं। यहाँ डांस थेरेपी, क्ले-पॉटरी, नाइट ट्रेक और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को प्रकृति से जोड़ा जाता है। साथ ही, स्थानीय समुदाय को बढ़ावा देने के लिए नाटी और तिब्बती नृत्य की विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं। इस पूरे अभियान को सफल बनाने में देशभर से आए उन जागरूक स्वयंसेवकों की मेहनत का बड़ा हाथ है, जो ‘जीरो वेस्ट’ के लक्ष्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित होकर काम करते हैं।



















