हमीरपुर: जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में एडीसी अभिषेक गर्ग ने हमीरपुर शहर और इसके आसपास चल रहे विभिन्न नशा निवारण एवं परामर्श केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों में दी जा रही बुनियादी सुविधाओं और मरीजों को मिलने वाले उपचार का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान एडीसी ने केंद्रों के रिकॉर्ड की गहनता से जांच की और संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने न केवल केंद्रों की व्यवस्थाओं को देखा, बल्कि वहां उपचाराधीन व्यक्तियों से सीधा संवाद भी किया। अभिषेक गर्ग ने मरीजों से सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें नशे की लत छोड़ने के लिए सही माहौल मिल रहा है। उन्होंने संचालकों को स्पष्ट किया कि सुविधाओं में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्हें मरीजों के पुनर्वसन के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना होगा।
इस निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि वार्ड नंबर-10 स्थित आयुष्मान रिहैबिलिटेशन सेंटर में 24, वार्ड नंबर-5 स्थित आईआरसीए में 11 और दोसड़क स्थित गोल्डन एज काउंसलिंग सेंटर में 21 लोग उपचार प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के दौरान एडीसी के साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय अत्री, डीएसपी नितिन चौहान, तहसीलदार नरेश पटियाल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।















