शिमला। हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने आधिकारिक तौर पर ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का शुभारंभ कर दिया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की यह महत्वाकांक्षी योजना प्रदेश के विभिन्न कोनों में छिपी अमूल्य पांडुलिपियों की खोज करने, उनके दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण पर केंद्रित है। इस मिशन के माध्यम से राज्य की प्राचीन लिपियों और दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, ताकि इस अनमोल ज्ञान को हमेशा के लिए सुरक्षित किया जा सके।
इस महत्वपूर्ण अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के माननीय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें विभाग के सचिव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि प्रदेश के मंदिरों, मठों और व्यक्तिगत पुस्तकालयों में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों को पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय पोर्टल पर लाया जाए। यह मिशन न केवल शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए प्राचीन ज्ञान के द्वार खोलेगा, बल्कि हिमाचल की ‘टांकरी’ और ‘भोट’ जैसी स्थानीय लिपियों को पुनर्जीवित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। सरकार का लक्ष्य इस मिशन के जरिए हिमाचल प्रदेश को भारतीय ज्ञान परंपरा का एक सशक्त केंद्र बनाना है।










