धर्मशाला, 30 मई: जिला कांगड़ा के नागरिकों को त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक विशेष पहल शुरू की है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यस्थता व सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में पूरे जिले के तालुका और जिला न्यायालयों में ”मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 अभियान“ चलाया जा रहा है। प्राधिकरण के सचिव मिहूल शर्मा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबे समय से लंबित पड़े मामलों का आपसी बातचीत और सुलह के जरिए तेजी से निपटारा करना है।
इस अभियान के तहत पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, चैक बाउंस, वित्तीय ऋण वसूली, मोटर वाहन दुर्घटना के दावे, घरेलू हिंसा और उपभोक्ता विवादों को सुलझाया जाएगा। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण, विभाजन, बेदखली, वाणिज्यिक, सेवा और समझौता योग्य आपराधिक मामलों का निपटारा भी आपसी सहमति से किया जा रहा है।
सचिव मिहूल शर्मा ने आगे बताया कि मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से पक्षकार आपसी बातचीत से अपने विवादों को खत्म करते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय, सरल, कम खर्चीली और समय की बचत करने वाली होती है। इससे कोर्ट के चक्कर काटने से मुक्ति मिलती है, पक्षकारों के बीच आपसी संबंध भी मधुर बने रहते हैं और अदालतों में लंबित मामलों का भार भी कम होता है। उन्होंने जिला कांगड़ा के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने मामलों के शांतिपूर्ण, त्वरित और संतोषजनक समाधान के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को अपनाएं।



















