चंडीगढ़, 10 मई 2026: बच्चों में होने वाले आंखों के कैंसर ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पीजीआईएमईआर (PGIMER) के एडवांस आई सेंटर (AEC) द्वारा आज रॉक गार्डन में एक ‘अवेयरनेस वॉकथॉन’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन 10 से 17 मई तक चलने वाले ‘विश्व रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह’ के उपलक्ष्य में किया गया।
क्या है रेटिनोब्लास्टोमा?
विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनोब्लास्टोमा बचपन में होने वाला सबसे आम लेकिन शुरुआती पहचान होने पर पूरी तरह उपचार योग्य आंखों का कैंसर है। इसका मुख्य लक्षण आंखों में “सफेद चमक” (White Reflex) है, जिसे “बिल्ली की आंख की चमक” (Cat’s Eye Reflex) भी कहा जाता है। पीजीआई के नेत्र विज्ञान विभाग में हर साल लगभग 70-80 नए मामले सामने आते हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे 1 से 5 वर्ष की आयु के होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनोब्लास्टोमा बचपन में होने वाला सबसे आम लेकिन शुरुआती पहचान होने पर पूरी तरह उपचार योग्य आंखों का कैंसर है। इसका मुख्य लक्षण आंखों में “सफेद चमक” (White Reflex) है, जिसे “बिल्ली की आंख की चमक” (Cat’s Eye Reflex) भी कहा जाता है। पीजीआई के नेत्र विज्ञान विभाग में हर साल लगभग 70-80 नए मामले सामने आते हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे 1 से 5 वर्ष की आयु के होते हैं।
वॉकथॉन और मुख्य संदेश
सुबह 6:30 बजे आयोजित इस वॉक को पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उनके साथ विभागाध्यक्ष प्रो. एस.एस. पांडव, रेटिनोब्लास्टोमा क्लिनिक की प्रभारी प्रो. उषा सिंह और अन्य वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे। वॉकथॉन में 250 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें दूर-दराज से आए इस कैंसर से उबर चुके बच्चे (Survivors) और उनके माता-पिता शामिल थे।
सुबह 6:30 बजे आयोजित इस वॉक को पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उनके साथ विभागाध्यक्ष प्रो. एस.एस. पांडव, रेटिनोब्लास्टोमा क्लिनिक की प्रभारी प्रो. उषा सिंह और अन्य वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे। वॉकथॉन में 250 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें दूर-दराज से आए इस कैंसर से उबर चुके बच्चे (Survivors) और उनके माता-पिता शामिल थे।
इस अवसर पर सुखना लेक पर राजीव मेहता और उनकी टीम द्वारा एक ‘नुक्कड़ नाटक’ भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि यदि बच्चे की आंख में सफेद चमक दिखे, तो समय बर्बाद न करें और नीम-हकीमों के पास जाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। देरी होने पर बच्चे की आंख और जान दोनों को खतरा हो सकता है।
साझा प्रयास
इस कार्यक्रम में पंचकुला, मोहाली और चंडीगढ़ के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टरों सहित पीजीआई के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, न्यूरोरेडियोलॉजी और ओरल हेल्थ साइंसेज विभाग की टीमों ने भी शिरकत की। विभाग द्वारा जल्द ही प्रभावित बच्चों के लिए एक ड्राइंग और पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी ताकि समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुंच सके।
इस कार्यक्रम में पंचकुला, मोहाली और चंडीगढ़ के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टरों सहित पीजीआई के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, न्यूरोरेडियोलॉजी और ओरल हेल्थ साइंसेज विभाग की टीमों ने भी शिरकत की। विभाग द्वारा जल्द ही प्रभावित बच्चों के लिए एक ड्राइंग और पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी ताकि समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुंच सके।





















