शिमला में पंचायत चुनावों को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और उनका काम केवल हंगामा करना रह गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया, वह वास्तविक मुद्दा नहीं बल्कि एक राजनीतिक भाषण था।
मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनावों में देरी को लेकर सफाई देते हुए कहा कि सरकार की मंशा चुनाव टालने की नहीं थी, बल्कि उन्हें मई माह में करवाने की योजना थी। उन्होंने बताया कि लाहौल स्पीति जैसे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए चुनावों को टालने का निर्णय लिया गया। उन्होंने 5 प्रतिशत रोस्टर में बदलाव की शक्ति उपायुक्त को दिए जाने का भी बचाव करते हुए कहा कि कई पंचायतों में ओबीसी सीटें व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होतीं, ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव जरूरी है।
उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को उछालने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह फैसला जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। साथ ही एंट्री टैक्स के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पिछले 40 वर्षों से लागू है और इसमें केवल मामूली परिवर्तन किया गया है। फास्ट टैग जैसी सुविधाओं के कारण कुछ दरों में बदलाव स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्यों से समन्वय बनाए रखा जाएगा और भगवंत मान से इस विषय पर बातचीत की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी गलत कार्य को बर्दाश्त नहीं करेगी और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है तो पहले पूरी जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पंचायत चुनाव को लेकर जारी यह विवाद अब प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।





















