कुल्लू | प्रिया शर्मा
कुल्लू-मनाली फोरलेन के निर्माण और इसकी गुणवत्ता पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। अभी मानसून की शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन प्री-मानसून की महज एक बारिश ने ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। ताजा मामला रायसन टोल प्लाजा के पास का है, जहां महज तीन महीने पहले करोड़ों की लागत से की गई टायरिंग ताश के पत्तों की तरह बह गई।
हैरानी की बात यह है कि जिस निर्माण को पिछली बार की आपदा से सबक लेकर अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने का दावा किया गया था, वह सड़क पैरापेट का मामूली वजन तक सहन नहीं कर सकी। स्थानीय जनता अब डरी हुई है कि जब एक सामान्य बारिश में सड़क का यह हाल है, तो बरसात के रौद्र रूप के दौरान यह फोरलेन जनता का सहारा बनेगा या मुसीबत।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रायसन के पास जिस तरह से सड़क धंसी है, उससे साफ जाहिर होता है कि कार्यप्रणाली में भारी खामियां हैं। निर्माण कार्य केवल खानापूर्ति और मजाक तक सीमित नजर आ रहा है। आपदा के समय जो ढांचा ढाल बनना चाहिए था, वह पहली फुहार में ही धराशायी हो गया। घाटी के कई अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है, जहां अधकचरे काम के कारण आने वाले मानसून में बड़े खतरे की आशंका बनी हुई है। प्रशासन और विभाग की इस सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली ने करोड़ों के बजट को पानी में बहा दिया है।




















