शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज शिमला में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स जॉइंट फ्रंट के एक प्रतिनिधिमंडल ने औपचारिक भेंट की। फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पेंशनभोगियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों से अवगत करवाया और अपनी मांगों के समर्थन में एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पिछले साढ़े तीन वर्षों से वित्तीय कठिनाइयों और केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल कर ऐतिहासिक कदम उठाया था, हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इसकी वजह से राज्य की 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को रोक दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा पेंशनरों को दी गई राहत का विवरण देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों के संशोधित वेतनमान से जुड़ी सभी बकाया राशि का सफलतापूर्वक भुगतान कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लेते हुए 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण (लीव एन्कैशमेंट) के सभी लंबित मामलों का निपटारा कर दिया है। इस बैठक में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान सहित फ्रंट के कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।


















