सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। शिमला में वित्त वर्ष 2026-27 की विधायक प्राथमिकता बैठक के दूसरे दिन के पहले सत्र में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के विधायकों के साथ उनकी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने संसाधनों से पिछले तीन वर्षों में 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है और वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के स्वामित्व से राज्य को लगभग 401 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ हुआ है, जबकि भविष्य में हर वर्ष लगभग 20 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजना में राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे राज्य को प्रति वर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 37,199 करोड़ रुपये जारी करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राशि घटते अनुपात में जारी की गई और वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्य को क्रमशः 10,249 करोड़, 9,377 करोड़, 8,057 करोड़, 6,249 करोड़ और 3,257 करोड़ रुपये मिले।
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उन्होंने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के साथ अन्याय होगा। मुख्यमंत्री ने केंद्र से राज्य की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राजस्व घाटा अनुदान बहाल करने और विशेष आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया। उन्होंने सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिपकी-ला दर्रे पर बॉर्डर टूरिज्म गतिविधियों की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ‘बौद्ध सर्किट’ की घोषणा की गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश को इससे बाहर रखना भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं, परंतु पर्यटन विकास के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। बैठक में कुल्लू, मंडी और शिमला जिले के विधायकों ने भी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और विकासात्मक मांगों को उठाया, जिसमें सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, पर्यटन और जलापूर्ति से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।





















