सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। लंबे समय तक दूध देने के बाद गायों में गर्भधारण न होना पशुपालकों के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। ऐसी गायों को अक्सर बांझ मान लिया जाता है, जिसके कारण कई बार उन्हें अनुपयोगी समझकर छोड़ दिया जाता है। इस चुनौती को देखते हुए पशु चिकित्सकों ने गहन अध्ययन किया और एक प्रभावी वैज्ञानिक उपचार विकसित किया है। शोध में सामने आया है कि विशेष प्रक्रिया के तहत लगातार नौ दिनों तक दिए जाने वाले टीकों और उसके बाद दी जाने वाली दवाओं से गायों में हार्मोनल संतुलन सुधरता है।
उपचार के लगभग पंद्रह दिनों के भीतर गायों में दोबारा दूध उत्पादन शुरू हो जाता है और गर्भधारण की संभावना भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि गौवंश को आवारा होने से भी बचाएगी। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे गायों को त्यागने के बजाय समय रहते नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर वैज्ञानिक उपचार अपनाएं।





















