तिब्बत टाइम्स से प्राप्त सत्यापित जानकारी के अनुसार, तिब्बती कार्यकर्ता येशे सांगपो, जो कि कार्द्ज़े प्रिफेक्चर के सेर्शुल काउंटी के बुम निंग गांव के निवासी हैं, को 18 साल की सजा पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है। हालांकि, लंबे समय तक जेल में रहने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।
58 वर्षीय येशे सांगपो को वर्ष 2007 में चीनी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अपने भाई लोबसांग के साथ मिलकर सेर्शुल काउंटी में स्थानीय लोगों का नेतृत्व करते हुए तिब्बती भाषा की स्वतंत्रता की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन चीनी भाषा नीतियों के खिलाफ था, और दोनों भाई इसके प्रमुख आयोजकों में शामिल थे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसमें मारपीट भी शामिल थी। इससे स्थिति हिंसक हो गई और पुलिस तथा आम लोगों के बीच झड़प हो गई। इसके बाद चीनी प्रशासन ने येशे सांगपो पर एक पुलिस अधिकारी की मौत का आरोप लगाया।
उन्हें पहले कुछ महीनों तक स्थानीय जेल में रखा गया और बाद में मई 2008 में उन्हें 18 साल की सजा सुनाई गई। सजा पूरी करने के बाद उन्हें 25 मार्च 2026 को रिहा कर दिया गया।
हालांकि, रिहाई के बाद उनकी हालत बेहद खराब बताई जा रही है, जिससे उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
येशे सांगपो की पत्नी का नाम त्सेरिंग डोल्मा है और वे बुम निंग गांव, सेर्शुल काउंटी के निवासी हैं। उनका मामला एक बार फिर क्षेत्र में मानवाधिकार, सांस्कृतिक स्वतंत्रता और कैदियों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े करता है।














