सरकारी व्यवस्था में क्या ईमानदारी से काम करना अब एक गुनाह बन चुका है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ अपनी ड्यूटी निष्पक्षता से निभाने पर एक पटवारी को तबादले की सजा मिली है। हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के बलोह पटवार सर्कल में तैनात पटवारी अमित कुमार का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने सच का साथ दिया। दरअसल जिला परिषद के चमनेड वार्ड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोहित शर्मा के नामांकन को अवैध कब्जे का आरोप लगाकर रद्द कर दिया गया था। जब यह मामला माननीय हाईकोर्ट पहुंचा तो पटवारी अमित कुमार ने बिना किसी दबाव के जमीन की बिल्कुल सही और ईमानदार रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की।
पटवारी की इसी सही रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने रोहित शर्मा को बेकसूर मानते हुए चुनाव लड़ने की इजाजत दी और रोहित शर्मा भारी मतों से चुनाव जीत भी गए। लेकिन इस न्याय की कीमत पटवारी अमित कुमार को अपनी प्रताड़ना से चुकानी पड़ी। आठ जून दो हजार छब्बीस को एक फरमान जारी कर उनका तबादला सीधे रिकांगपिओ के एक बेहद दुर्गम क्षेत्र में कर दिया गया। इस प्रशासनिक कार्रवाई पर हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सरासर नीचता करार देते हुए कहा है कि ईमानदारी से ड्यूटी करने वाले पर यह गाज गिराई गई है। विधायक ने साफ चेतावनी दी है कि जनता इस तानाशाही को देख रही है और आने वाले चुनावों में इसका करारा जवाब देगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी कोर्ट के सामने सच रिपोर्ट रखेगा तो क्या व्यवस्था उसे इसी तरह प्रताड़ित करेगी।





















