नई दिल्ली। संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने देश की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और आने वाले वर्षों के लक्ष्यों का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। अपने विस्तृत भाषण में उन्होंने भारत की उपलब्धियों, सरकारी नीतियों, सामाजिक समावेशन, आर्थिक उन्नति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
राष्ट्रपति ने कहा कि बीता वर्ष तेज़ विकास और सांस्कृतिक विरासत के गौरवपूर्ण उत्सव के रूप में याद किया जाएगा। वंदे मातरम् के 150 वर्ष, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा और सरदार पटेल की 150वीं जयंती जैसे आयोजनों ने देशवासियों को इतिहास से प्रेरणा लेने का अवसर दिया और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सशक्त किया।
उन्होंने बताया कि 2026 के साथ भारत इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की मजबूत नींव पिछले एक दशक में रखी गई है। राष्ट्रपति के अनुसार, बीते 10- 11 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में ठोस प्रगति हुई है, जिसके चलते 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं: राष्ट्रपति
सामाजिक न्याय पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों, जनजातीय समाज और वंचितों के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल की हैं। पिछले दशक में चार करोड़ पक्के घरों का निर्माण हुआ, जल जीवन मिशन के तहत साढ़े 12 करोड़ परिवारों तक नल से जल पहुंचा और उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिले। डीबीटी के जरिए पौने सात लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए, जिससे पारदर्शिता बढ़ी।
स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत योजना को एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जिसके तहत अब तक 11 करोड़ से अधिक मुफ्त इलाज किए गए हैं। सिकल सेल एनीमिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस और ट्रेकोमा जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। वय वंदना कार्ड और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से बुजुर्गों और आम नागरिकों को बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बताया। रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन, चावल, मछली और दुग्ध उत्पादन में अग्रणी स्थान तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की तेज़ प्रगति देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है। मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात और सेमीकंडक्टर निवेश को भविष्य के लिए अहम कदम बताया गया।
ऑपरेशन सिंदूर और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के तहत राष्ट्रपति ने ग्रामीण सड़कों, रेलवे के पूर्ण विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेनों, मेट्रो विस्तार, इनलैंड वॉटरवेज और विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल जैसे प्रोजेक्ट्स का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने आतंकवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई की चर्चा की। ऑपरेशन सिंदूर और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया और स्पष्ट किया कि भारत किसी भी आतंकी चुनौती का दृढ़ जवाब देगा।
विदेश नीति के संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत संतुलित, मानवीय और जिम्मेदार भूमिका निभा रहा है। ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना, आपदा के समय सहायता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाती है।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों की सामूहिक यात्रा है। उन्होंने सांसदों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित में एकजुट होकर संविधानिक मूल्यों के साथ देश की प्रगति में योगदान दें।





















