मंडी, 14 अगस्त (2026): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने अपने परिसर में गरिमा, आपसी सम्मान और सुरक्षा की संस्कृति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान की आंतरिक समिति द्वारा “लैंगिक संवेदनशीलता और POSH अधिनियम के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस संवेदीकरण कार्यक्रम में संस्थान के 850 से अधिक सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
व्यापक स्तर पर जुटी सहभागिता
संस्थान के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्यशाला में कैंपस के विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इसमें मुख्य रूप से लगभग 122 संकाय सदस्य (फैकल्टी), 136 गैर-शिक्षण कर्मचारी और 600 से अधिक पीएच.डी. शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संयोजन आंतरिक समिति की पीठासीन अधिकारी प्रो. नीतू कुमारी द्वारा किया गया, जबकि समिति की सदस्य डॉ. गीता रानी ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई।
संस्थान के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्यशाला में कैंपस के विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इसमें मुख्य रूप से लगभग 122 संकाय सदस्य (फैकल्टी), 136 गैर-शिक्षण कर्मचारी और 600 से अधिक पीएच.डी. शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संयोजन आंतरिक समिति की पीठासीन अधिकारी प्रो. नीतू कुमारी द्वारा किया गया, जबकि समिति की सदस्य डॉ. गीता रानी ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई।
संवेदनशील और सुरक्षित माहौल पर जोर
यह आयोजन आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मी धर बेहरा के मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व में संपन्न हुआ। संस्थान के प्रवक्ताओं ने बताया कि निदेशक के नेतृत्व में आईआईटी मंडी न केवल शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, बल्कि एक संवेदनशील, समावेशी और जिम्मेदार संस्थागत संस्कृति के निर्माण को भी प्राथमिकता दे रहा है। उनका उद्देश्य एक ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां पेशेवर उत्कृष्टता के साथ-साथ हर सदस्य की गरिमा सुरक्षित रहे।
यह आयोजन आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मी धर बेहरा के मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व में संपन्न हुआ। संस्थान के प्रवक्ताओं ने बताया कि निदेशक के नेतृत्व में आईआईटी मंडी न केवल शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, बल्कि एक संवेदनशील, समावेशी और जिम्मेदार संस्थागत संस्कृति के निर्माण को भी प्राथमिकता दे रहा है। उनका उद्देश्य एक ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां पेशेवर उत्कृष्टता के साथ-साथ हर सदस्य की गरिमा सुरक्षित रहे।
पारंपरिक शुरुआत और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स प्रो. वेंकटेश एच. चेंब्रोलू और डीन एसआरआईसी प्रो. श्याम कुमार मसकापल्ली ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और सुरक्षा से जुड़े कानूनी व नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए इस कार्यशाला को समय की मांग बताया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स प्रो. वेंकटेश एच. चेंब्रोलू और डीन एसआरआईसी प्रो. श्याम कुमार मसकापल्ली ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और सुरक्षा से जुड़े कानूनी व नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए इस कार्यशाला को समय की मांग बताया।
कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के अध्यक्ष, केंद्र प्रमुख, उप-कुलसचिव, सहायक कुलसचिवों सहित भारी संख्या में संकाय सदस्य, कर्मचारी और शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को POSH अधिनियम (2013) के प्रावधानों और शिकायतों के निवारण तंत्र के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।




















