हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 7 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की कानूनी कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक पिछली तारीख (retrospective) से लागू नहीं किए जा सकते और कानून का उद्देश्य भविष्य की व्यवस्था सुधारना होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना। इस आदेश के साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अयोग्य घोषित किए गए पूर्व विधायकों की रोकी गई पेंशन और सभी बकाया राशि एक महीने के भीतर जारी की जाए, अन्यथा सरकार को इस राशि पर 6% वार्षिक ब्याज देना होगा।
इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि यह सरकार के चेहरे पर करारा तमाचा है, जिसने सत्ता में आते ही विपक्ष को परेशान करने के लिए कानून को हथियार बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 और 2026 के विधायी संशोधनों के जरिए अयोग्य विधायकों की पेंशन रोकने की कोशिश पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित थी, जिसे अब न्यायालय ने बेनकाब कर दिया है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं किया जा सकता।


















