भारतीय भाषाओं और साहित्य को सशक्त बनाने की दिशा में 55 शैक्षणिक ग्रंथों के विमोचन पर हर्ष व्यक्त किया गया है। इन ग्रंथों में कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओड़िया और तमिल जैसी शास्त्रीय भाषाओं की महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं। साथ ही तिरुक्कुरल की सांकेतिक भाषा में व्याख्या भी इस पहल का हिस्सा है, जो समावेशी ज्ञान प्रसार को दर्शाती है।
शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक स्वाभिमान के केंद्र में भारत की भाषाई विरासत
यह प्रयास शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक स्वाभिमान के केंद्र में भारत की भाषाई विरासत को स्थापित करने के व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। भारतीय भाषाएँ सदैव देश को जोड़ने वाली शक्ति रही हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लगातार इस बात पर बल दिया है कि भारत की सभी भाषाएँ राष्ट्रीय भाषाएँ हैं और सभी को समान सम्मान प्राप्त है।
कठिन परिस्थितियों और उन्हें समाप्त करने के प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाओं ने अपनी जीवंतता बनाए रखी है। केंद्र सरकार ने अनुसूचित भाषाओं की संख्या बढ़ाने, शास्त्रीय ग्रंथों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने तथा मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहन देने जैसे कई कदम उठाए हैं।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। लोकतंत्र की जननी और भाषाई विविधता से समृद्ध भारत में यह हमारी साझा जिम्मेदारी है कि हम अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को सुरक्षित रखें और भावी पीढ़ियों तक उसका महत्व पहुँचाएँ।





















