हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)
उपमंडल भोरंज के तहत आने वाले कड़ोहता गांव के वीर सपूत और देश के गौरव अमर शहीद अंकुश ठाकुर का शहीदी दिवस मंगलवार को बेहद भावुक और गरिमामयी माहौल में मनाया गया। इस पावन अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मनोह में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम और स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय जनता और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया याद
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जाने-माने जनसेवक और समाजसेवी सुशील ठाकुर ने अमर शहीद अंकुश ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी शहादत को नमन किया। इस दौरान पूरा स्कूल परिसर “भारत माता की जय” और “शहीद अंकुश ठाकुर अमर रहे” के देशभक्ति नारों से गूंज उठा। इस भावुक पल में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
‘शहीद अंकुश हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे’
इस मौके पर जनसेवक सुशील ठाकुर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “शहीद अंकुश ठाकुर आज भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन वे हम सभी के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर योद्धा को हमारा शत-शत नमन है। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देती रहेगी।”
रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन
शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में युवाओं को समाज सेवा से जोड़ने के लिए एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया। शिविर में क्षेत्र के युवाओं और स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ रक्तदान कर शहीद को अपनी अनूठी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में शहीद अंकुश ठाकुर के पिता अनिल ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहे। उनके साथ 3 पंजाब रेजिमेंट के जांबाज जवान भी अपने साथी की शहादत को सलाम करने पहुंचे थे।
गलवान घाटी में दिया था सर्वोच्च बलिदान
गौरतलब है कि सिपाही अंकुश ठाकुर ने जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। 24 नवंबर 1998 को हमीरपुर जिले के कड़ोहता गाँव में जन्मे अंकुश ठाकुर ने कम उम्र में ही देश सेवा का मार्ग चुना था। आज उनकी पुण्यतिथि पर पिता अनिल कुमार, माता उषा देवी सहित पूरे प्रदेश को अपने इस लाडले की शहादत पर गर्व है।





















