हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता, जनसंचार एवं नव मीडिया स्कूल और विश्व संवाद केंद्र शिमला के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को धौलाधार परिसर-1 में देवर्षि नारद जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय देवर्षि नारद की दृष्टि में पत्रकारिता के मूल्य और आदर्श रहा, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कुलपति प्रो. बंसल, मुख्य वक्ता प्रताप सिंह समयाल, कुलसचिव नरेंद्र सांख्यान और अधिष्ठाता प्रो. अर्चना कटोच द्वारा दीप प्रज्जवलन और मां सरस्वती व देवर्षि नारद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया गया।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वर्तमान समय में लोक कल्याणकारी पत्रकारिता ही सबसे बड़ी आवश्यकता है और पत्रकारों को देवर्षि नारद के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। स्वागत भाषण के दौरान अधिष्ठाता प्रो. अर्चना कटोच ने नारद मुनि के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उन्हें विश्व का प्रथम संचारक बताया और कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा धर्म की स्थापना और जनहित रहा। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मुख्य वक्ता प्रताप सिंह समयाल ने पत्रकारिता के ऐतिहासिक संदर्भों को जोड़ते हुए बताया कि हिंदी का पहला समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ भी नारद जयंती के दिन ही वर्ष 1826 में शुरू हुआ था, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके गहरे प्रभाव को दर्शाता है।
प्रताप सिंह समयाल ने देवर्षि नारद को एक ग्लोबल कम्युनिकेटर की संज्ञा दी जिनका संवाद हर वर्ग के साथ समान था। उन्होंने वर्तमान मीडिया में सकारात्मक खबरों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए पांच संकल्पों की आवश्यकता बताई, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों का बचाव, आत्म-बोध और कर्तव्य पालन शामिल हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान इस बात पर आम सहमति रही कि आधुनिक पत्रकारिता को अपनी जड़ों की ओर लौटकर नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।














