सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। शिमला से जारी एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पंचायत चुनावों को लेकर सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने शुरू से ही पंचायत चुनाव न करवाने का मन बना लिया था और इसी कारण जनता को लगातार भ्रमित किया जाता रहा। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब सरकार को हाईकोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती ही देनी थी, तो फिर चुनाव की तैयारियों का दिखावा क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा समय पर चुनाव न होने पर सवाल उठा रही थी, तब मुख्यमंत्री और मंत्री सार्वजनिक रूप से चुनाव समय पर होने का दावा करते रहे, जो अब पूरी तरह झूठ साबित हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की बार-बार अनदेखी की और न तो उनके पत्रों का जवाब दिया गया और न ही निर्वाचन सूची का समय पर प्रकाशन किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतंत्र और संविधान की बातें तो करती है, लेकिन व्यवहार में स्थानीय स्वशासन की जड़ों को कमजोर कर रही है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को कुचल रही है।
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जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि निर्वाचित पंचायतों और शहरी निकायों के बिना न तो विकास संभव है और न ही केंद्र सरकार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में देरी के कारण प्रदेश को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली हजारों करोड़ रुपये की राशि से वंचित होना पड़ सकता है। साथ ही मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जहां प्रदेश में लाखों प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और सैकड़ों पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला। जयराम ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह चुनाव खर्च का बहाना बनाती है, लेकिन चुनाव टालने के लिए कानूनी लड़ाइयों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि आपदा का हवाला देकर चुनाव रोकने वाली सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा और पुनर्वास के लिए अब तक कितने दौरे किए हैं, यह प्रदेश की जनता जानना चाहती है।





















