शिमला में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार के चौथे बजट (जिसमें एक अनुपूरक बजट भी शामिल है) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों को “तार-तार” किया गया और इसे दो चरणों में आयोजित करना भी अव्यवस्था का संकेत है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार बजट में वृद्धि के बजाय कमी देखने को मिली है और करीब 3586 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने सरकार पर कर्ज़ के मोर्चे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अब तक का सबसे अधिक ऋण वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लिया गया है। पूर्व सरकारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार के समय ऋण वृद्धि दर करीब 10 प्रतिशत रही, जबकि उनके अपने कार्यकाल में यह लगभग 7.2 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में यह दर 16 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है, जो चिंताजनक है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि साढ़े तीन साल के कार्यकाल में सरकार की स्थिति दयनीय हो गई है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। कर्मचारियों को एरियर और डीए देने के वादे पूरे नहीं हुए, उल्टा अधिकारियों, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सैलरी तक में कटौती की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने लगातार अपनी आवाज़ बुलंद की, लेकिन बजट सत्र समाप्त होने के बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले और मुख्यमंत्री सदन में खामोश रहे।
कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं और जंगल, नशा तथा भूमि माफिया सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का इन तत्वों को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है। शैक्षणिक संस्थानों में घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने शूलिनी विश्वविद्यालय में आत्महत्या की घटना को चिंताजनक बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने गारंटियों और योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले तीन बजटों में की गई घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं और सहारा पेंशन बंद होने से लोग परेशान हैं। पूर्व विधायकों की पेंशन बंद करने के निर्णय को भी उन्होंने गलत बताया और कहा कि प्रभावित लोगों को न्याय के लिए अदालत जाने का अधिकार है।
आरक्षण और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि 5 प्रतिशत आरक्षण देने का अधिकार उपायुक्त को क्यों दिया गया, जबकि इससे प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारी खुद असमंजस में हैं कि वे किसके निर्देशों का पालन करें।
अंत में जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि निर्णय सोच-समझकर लेने चाहिए और जल्दबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने आरडीजी को लेकर सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्र से मिलने वाली मदद के बावजूद धन्यवाद न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है और “अमीर राज्य” बनाने के दावे बिना किसी ठोस आधार के किए जा रहे हैं। ठाकुर ने चेतावनी दी कि आने वाले चुनावों में जनता इसका करारा जवाब देगी।
















