धर्मशाला के ढगवार में बन रहा यह अत्याधुनिक और पूरी तरह से स्वचालित मिल्क प्लांट लगभग 225 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया जा रहा है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा बनाए जा रहे इस राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट के जल्द ही पूरी तरह शुरू होने की संभावना है। इस आधुनिक संयंत्र के चालू होने के बाद यहाँ न केवल दूध का प्रसंस्करण होगा बल्कि फ्लेवर्ड मिल्क, दही, लस्सी, मोज़रेला चीज़, पनीर, योगर्ट और खोआ जैसे कई उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा।
दूध संग्रहण और सहकारी समितियों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इस क्षेत्र में डेयरी क्षेत्र की प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2023 में जहाँ प्रतिदिन केवल 6,200 लीटर दूध का संग्रहण होता था, वहीं अब यह आँकड़ा चार गुना बढ़कर लगभग 24,000 लीटर प्रतिदिन तक पहुँच गया है। इस सफलता के पीछे डेयरी सहकारी समितियों के नेटवर्क का बड़ा हाथ है जो पहले मात्र 44 थीं और अब बढ़कर 352 हो चुकी हैं। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों दुग्ध उत्पादक सीधे तौर पर एक संगठित व्यवस्था से जुड़ पाए हैं।
किसानों को लाभ और अतिरिक्त बुनियादी ढांचा
ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की सुविधा और दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कांगड़ा मिल्क यूनियन के तहत 20-20 हजार लीटर की क्षमता वाले दो नए चिलिंग सेंटर भी लगाए जा रहे हैं। संयंत्र प्रबंधक अखिलेश पाराशर के अनुसार किसानों को मिल रही बेहतर खरीद दरों के कारण ही इस पूरे क्षेत्र में दूध उत्पादन को बढ़ावा मिला है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, सांसद राजीव भारद्वाज और विधायक सुधीर शर्मा ने इस पूरे प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर इसे कांगड़ा क्षेत्र के विकास और स्थानीय किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम बताया है।


















