30 मई को कसोल में बाहरी पर्यटकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना ने पूरी पार्वती घाटी को हिलाकर रख दिया है। इस जानलेवा हमले के बाद स्थानीय जनता में असुरक्षा और भय का माहौल गहरा गया है। लोगों का गुस्सा प्रशासन की ढीली व्यवस्था के खिलाफ फूट पड़ा है और उन्होंने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की पुरजोर मांग उठाई है।
लचर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की मांग
घाटी के निवासियों ने इस हिंसक वारदात के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जनता ने घाटी के प्रवेश द्वारों पर स्थायी पुलिस चेक पोस्ट स्थापित करने की अपील की है ताकि हर बाहरी वाहन की गहन जांच की जा सके।
ट्रैफिक जाम में फंसी जिंदगी और एंबुलेंस
इस हादसे ने घाटी की यातायात व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। गोलीबारी में घायल हुए युवक को अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस कई घंटों तक भारी ट्रैफिक जाम में फंसी रही, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर संकट खड़ा हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पर्यटन सीजन के दौरान यहां 24 घंटे जाम लगा रहता है, लेकिन प्रशासन ने वाहनों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं की है।
खस्ताहाल सड़कें और हादसों का बढ़ता खतरा
यातायात व्यवस्था के साथ-साथ घाटी की सड़कों की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। मुख्य मार्ग जगह-जगह से टूट चुके हैं और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गए हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। आक्रोशित जनता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि सड़कों की सुध ली जाए और तुरंत पैचवर्क तथा टायरिंग का काम शुरू करके लोगों को इस नारकीय स्थिति से निजात दिलाई जाए।
















