मुख्य अतिथि एच. राजेश प्रसाद ने मानवीय सेवा के आयाम को रेखांकित करते हुए आगे कहा, “सारथी जैसे कार्यक्रम यह सिद्ध करते हैं कि स्वास्थ्य सेवा केवल दवाओं और मशीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय स्पर्श और आपसी जुड़ाव का नाम है। जब एक छात्र किसी अनजान मरीज का हाथ थामकर उसे सही विभाग तक पहुँचाता है, तो वह केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका नहीं निभा रहा होता, बल्कि समाज में विश्वास और सेवा की नींव को और मजबूत कर रहा होता है।”
स्वयंसेवक हैं संस्थान की आत्मा: प्रो. विवेक लाल
प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने स्वयंसेवकों के जज्बे की सराहना करते हुए कहा, “ये युवा छात्र अब संस्थान की आत्मा बन गए हैं। वे मरीजों के डर को दूर करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे अकेले नहीं हैं। सारथी स्वयंसेवक केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता के सर्वोत्तम रूप को सीख रहे हैं।”
शिक्षा और सेवा का क्रांतिकारी समन्वय
विशिष्ट अतिथि प्रेरणा पुरी, आईएएस, सचिव शिक्षा, ने इस पहल को क्रांतिकारी बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का यह समन्वय न केवल छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करता है, बल्कि उन्हें एक संवेदनशील नागरिक भी बनाता है। उन्होंने इस मॉडल को अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी विस्तार देने की बात कही।
उत्कृष्ट सेवा के लिए स्वयंसेवक सम्मानित
समारोह के दौरान, पिछले एक वर्ष में उत्कृष्ट सेवा देने वाले स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में एक विशेष ‘सारथी इम्पैक्ट फिल्म’ भी दिखाई गई, जिसमें दिखाया गया कि कैसे इन छात्रों ने ओपीडी और आपातकालीन वार्डों में हजारों मरीजों की राह आसान की है।


















