शिमला :- प्रदेश में 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सीटू के बैनर तले प्रदेशभर में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारी पांच दिन की हड़ताल पर हैं और तीसरे दिन भी छोटा शिमला स्थित सचिवालय के बाहर बारिश के बावजूद डटे रहे। इस प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते तीसरे दिन भी एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा। यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज करते हुए निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, उपाध्यक्ष सुदेश कुमारी, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन कार्यरत सैकड़ों पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी भारी शोषण का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा, जबकि उनसे 12-12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है और ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया जाता। हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट और अन्य न्यायिक आदेशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
यूनियन नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, उनका तबादला कर दिया जाता है या नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है, जबकि ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन से ही दोनों ईपीएफ शेयर काटे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यूनियन ने मांग उठाई कि कर्मचारियों को नियमानुसार न्यूनतम वेतन, डबल ओवरटाइम, सभी छुट्टियां और पूर्ण वेतन दिया जाए। साथ ही न्यायालयों और श्रम विभाग के आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जीवीके ईएमआरआई के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य बकाया राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है, जिसे तुरंत दिया जाना चाहिए। यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
















