शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज सरकारी विज्ञापनों पर होने वाले खर्च का मुद्दा गरमाया रहा। सदन में विधायक सुधीर शर्मा द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ने विज्ञापनों पर मितव्ययिता बरतते हुए पिछली सरकार के मुकाबले काफी कम धनराशि खर्च की है। मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक विज्ञापनों पर कुल 14 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि पिछली सरकार ने अपने समय में प्रचार-प्रसार पर लगभग 28 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की थी।
इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए सुधीर शर्मा ने विज्ञापनों की उपयोगिता और उनकी लोकेशन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई स्थानों पर सरकारी योजनाओं के विज्ञापन बोर्ड और फ्लेक्स ऐसी जगहों पर लगाए गए हैं, जहाँ से गुजरने वाले वाहनों या राहगीरों की नजर उन पर पड़ती ही नहीं। उन्होंने इसे सरकारी धन की बर्बादी करार देते हुए विज्ञापनों की रणनीति में सुधार की मांग की।
मुख्यमंत्री ने सुधीर शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार फिजूलखर्ची रोकने के लिए गंभीर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी सरकार ने बसों पर विज्ञापन लगाने की प्रक्रिया को पूरी तरह बंद रखा है। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि वर्तमान में चल रहा अधिकांश विज्ञापन ढांचा पिछली सरकार की तर्ज पर ही काम कर रहा है। होर्डिंग्स की विजिबिलिटी के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों के किनारे दिखने वाले सभी बोर्ड सरकारी नहीं होते, बल्कि कई बार राजनीतिक दल भी अपने स्तर पर प्रचार सामग्री लगाते हैं, जिसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं होता।





















