शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जल शक्ति विभाग की विभिन्न परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर सदन में गरमागरम चर्चा हुई। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने विभाग की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार से प्राप्त धनराशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए, जिसका जवाब उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विस्तार से दिया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए सदस्य बलवीर ने केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत विभाग को स्वीकृत धनराशि का मुद्दा उठाया और बताया कि कई ऐसी स्कीमें हैं जिनमें विभाग पहले ही 12-13 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। इसी कड़ी में सदस्य रणधीर ने डिज़ाइन प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार न होने के कारण आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार से मिले फंड का सही हिसाब जनता के सामने नहीं आ पाया है, जिससे धरातल पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इन सवालों का उत्तर देते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और धनराशि हमेशा योजना की शर्तों के अनुसार ही आवंटित की जाती है। उन्होंने हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा तैयार करने में सामान्य से अधिक खर्च आता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि जल जीवन मिशन को विस्तारित किया गया है और सरकार हर छोटी-बड़ी योजना को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उपमुख्यमंत्री ने आगे आश्वस्त किया कि यदि किसी योजना के सफल संचालन के लिए 2-4 लाख रुपए जैसी छोटी राशि की भी आवश्यकता होगी, तो उसका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। चर्चा के अंत में उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से भी योजनाओं के प्रति जागरूकता दिखाने की अपील की और उनसे पूछा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की कितनी स्कीमों की सटीक जानकारी रखते हैं, ताकि आपसी समन्वय से विकास कार्यों को गति दी जा सके।





















