सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की लोक लेखा समिति ने अपने गुजरात प्रवास के दौरान गांधीनगर में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात कर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान समिति के सदस्यों ने बताया कि किस प्रकार हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को एक व्यापक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है और किसानों को इससे जोड़ने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। लोक लेखा समिति अध्यक्ष अनिल शर्मा सहित समिति के सदस्य केवल सिंह पठानिया, संजय रत्न, इंद्र सिंह, बलबीर वर्मा, जनक राज, जीतराम कटवाल, मलेंद्र राजन और कैप्टन रणजीत सिंह अध्ययन भ्रमण के तहत गुजरात पहुंचे हुए हैं। उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बताया कि राज्यपाल के साथ हुई चर्चा के दौरान प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में हिमाचल की उपलब्धियों को सराहा गया और इस मॉडल को अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बताया गया। केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्रदान कर प्राकृतिक खेती को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के सभी कृषि जलवायु क्षेत्रों में किसान और बागवान प्राकृतिक विधियों से अनाज, सब्जियां और फल उगा रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
यह भी पढ़ें:https://sidhivinayaktimes.com/order-collapses-in-punjab-aap-govt-totally-failed-nayab-singh-saini/
उन्होंने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में तीन लाख छह हजार से अधिक किसानों और बागवानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। राज्य की 3584 पंचायतों में तीन लाख से अधिक किसान लगभग 38,437 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक तरीके से विविध फसलें उगा रहे हैं, जो प्रदेश की कृषि व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। केवल सिंह पठानिया ने बताया कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष नीतियां अपना रही है। प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं और मक्का पर देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्का का 40 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। इसके अलावा उत्पादों को खरीद केंद्रों तक पहुंचाने के लिए प्रति किलोग्राम 2 रुपये परिवहन सब्सिडी भी दी जा रही है। प्राकृतिक खेती से उगाई गई कच्ची हल्दी के लिए भी 90 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी तय किया गया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है।





















