सिद्धविनायक टाइम्स शिमला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय की शोध समिति ने धर्मशाला में “धर्मशाला की पवित्र परंपराएं: ऐतिहासिक मंदिरों के विशेष संदर्भ में” विषय पर 15 दिवसीय शोध इंटर्नशिप का आयोजन किया, जो 08 जनवरी से 22 जनवरी, 2026 तक चलेगी। इस इंटर्नशिप का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक-सामाजिक संरचना से परिचित कराना तथा फील्ड डेटा का विश्लेषण सिखाना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार ने धर्मशाला क्षेत्र के इतिहास, भूगोल और प्रमुख मंदिरों जैसे भाग्सु नाग, इन्द्रु नाग, अघनजर महादेव और बाण गंगा के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने बताया कि मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि विज्ञान और सामाजिक जीवन का जीवंत दस्तावेज हैं। मुख्य वक्ता प्रो. सूर्य रश्मि रावत ने वेद, उपनिषद और पुराणों, गुरु–शिष्य परंपरा, कर्म आधारित वर्ण संरचना, मंदिरों में निहित वैज्ञानिक संकेत और सामाजिक समरसता में मेलों और कुंभ की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को लोक परंपराओं, ऐतिहासिक तथ्यों और आधुनिक शोध पद्धतियों के समन्वित अध्ययन के महत्व पर प्रशिक्षित किया गया, और अनुशासन, समय प्रबंधन तथा शोध नैतिकता पर विशेष जोर दिया गया।





















