ओमान के तट के पास तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के भालू गांव निवासी 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा की मौत के बाद उनके पैतृक गांव में मातम पसरा हुआ है। इस दुखद हादसे के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है और पिछले तीन दिनों से दिन-रात घर के आंगन में बैठकर विलाप करते हुए आदित्य के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहा है। इकलौते बेटे को खोने वाले पिता राजेश शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि यदि हमले के बाद आदित्य की सांसें चल रही थीं, तो उसे समय रहते प्राथमिक उपचार क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया है कि जब जहाज पर सवार 21 अन्य नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, तो आदित्य सहित तीन नाविकों को रेस्क्यू करने में इतनी देरी क्यों हुई। पिता ने कंपनी और जहाज के कैप्टन की लापरवाही पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब कई दिनों से अमेरिका द्वारा हमले की लगातार चेतावनी दी जा रही थी, तो किस आधार पर नाविकों की जान जोखिम में डालकर जहाज को ओमान की तरफ भेजा गया। दुखी परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द गांव भिजवाया जाए ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने व्यावसायिक लाभ के लिए युवाओं की जिंदगी खतरे में डालने वाली शिपिंग कंपनी और जिम्मेदार कैप्टन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई व उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।


















