चंडीगढ़:भाजपा के राज्य महासचिव अनिल सरीन ने मनरेगा को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र पर मनरेगा के तहत 23,446 करोड़ रुपये बकाया होने का गलत दावा कर रही है और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
स्थायी समिति की रिपोर्ट का गलत हवाला
सरीन ने कहा कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज पर स्थायी समिति (2024- 25) की रिपोर्ट के आंकड़ों को गलत तरीके से सामने रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस रिपोर्ट के एक पन्ने का हवाला दिया जा रहा है, उसी रिपोर्ट के अगले पन्ने में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वर्ष 2024–25 में किसी भी राज्य की मनरेगा मजदूरी का कोई बकाया नहीं है।
किस्त जारी करने की प्रक्रिया स्पष्ट
उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा योजना के तहत हर साल 1 अप्रैल से पहले केंद्र सरकार पहली किस्त जारी कर देती है। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा राशि के उपयोग का प्रमाण पत्र भेजने पर अगली किस्त तुरंत जारी होती है। यदि कोई राज्य तय नियमों के अनुसार उपयोग प्रमाण पत्र नहीं भेजता, तो कानून के तहत अगली किस्त जारी नहीं की जा सकती।
हजारों पंचायतों का ऑडिट लंबित
अनिल सरीन ने आरोप लगाया कि पंजाब की 13,304 पंचायतों में से 5,915 पंचायतों का अब तक ऑडिट नहीं हुआ है। इसके साथ ही मनरेगा में 10,653 फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, लेकिन राज्य सरकार इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किन लोगों को बचा रही है।
घोटालों की जानकारी पहले ही केंद्र को दी गई
सरीन के अनुसार, मनरेगा में हो रहे कथित घोटालों की जानकारी यूनियन नेताओं द्वारा पहले ही केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावे केवल बयानबाजी तक सीमित हैं, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और ही है।
आटा-दाल योजना पर भी सवाल
आटा-दाल योजना को लेकर भी सरीन ने आप सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जो सरकार खुद को दलितों और गरीबों की हितैषी बताती है, उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि आटा-दाल योजना किसने बंद की और इसके पीछे क्या कारण रहे।
100 दिन के रोजगार का दावा अधूरा
अंत में अनिल सरीन ने कहा कि 100 दिन का रोजगार देने के बजाय पंजाब सरकार केवल औसतन 36 दिन का ही रोजगार दे पाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा आने वाले समय में हर मंच पर आप सरकार के दावों की पोल खोलेगी और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को जनता के सामने सही आंकड़े रखने होंगे।

















