18 मार्च से हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है. सत्र की शुरुआत से पहले ही विपक्ष ने अपने तेवर दिखा दिए हैं. शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के लिए यह सत्र मुश्किलों भरा रहने वाला है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास कार्यों जैसे विभिन्न मुद्दों पर नोटिस दिए हैं. सरकार को इन बातों का जवाब देना होगा लेकिन सरकार के पास जवाब नहीं है. जयराम ठाकुर एक बार फिर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और सरकार की सदन को झूठ बोल कर गुमराह करने की आदत बन गई है.
जयराम ठाकुर ने कहा कि पहली बार परंपराओं के विपरीत राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को लंबित रखा गया है. प्रदेश सरकार इस समय असमंजस की स्थिति से गुजरती नजर आ रही है. सबसे बड़ा मुद्दा राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर उठ रहा है. विपक्ष, खासकर भारतीय जनता पार्टी, ने विकास कार्यों पर विराम, वित्तीय संकट और कानून व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर नोटिस दिए हैं. विपक्ष का आरोप है कि सरकार के खिलाफ अविश्वास का माहौल बन चुका है और सदन के भीतर झूठ बोलना सरकार की आदत बन गई है. जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए इसकी जांच की बात भी कही है. प्रदेश में धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर पैसे लेने का बड़ा गिरोह सक्रिय है. प्रदेश से उद्योग पलायन पलायन कर रहे हैं और साढ़े तीन साल बाद भी संस्थानों के बंद होने का सिलसिला जारी है. जयराम ठाकुर ने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस को RTI के दायरे से बाहर करने के फैसले पर भी सवाल उठाए. जयराम ठाकुर ने कहा कि आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है. सूचना का अधिकार अधिनियम को डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार लेकर आई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है और सत्ता पक्ष इन सभी आरोपों का सदन में जवाब देना होगा.
















