सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नियम-102 के तहत प्रस्तुत सरकारी संकल्प पर चर्चा के दौरान राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने जवाब में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश के हितों के मुद्दे पर उसका रुख स्पष्ट नहीं है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के 15वें और 16वें वित्त आयोग के समक्ष दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि तब आरडीजी को हिमाचल प्रदेश के लिए अनिवार्य बताया गया था, जबकि अब सदन में अलग रुख अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया से मुलाकात कर आरडीजी की टेपरिंग से राज्य को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया है।
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उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी और जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में अधिक राशि मिली, जबकि वर्तमान सरकार को अपेक्षाकृत कम सहायता मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाएं लागू कीं और पुरानी पेंशन योजना बहाल की। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया और भाजपा विधायक वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी प्रदेश के अधिकार से जुड़ा विषय है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, जबकि विपक्ष ने सरकार पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। सदन में देर तक इस मुद्दे पर राजनीतिक गर्माहट बनी रही।





















