सिद्धिविनायक टाइम्स /धर्मशाला, 21 मार्च: मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश बजट 2026-27 राज्य के समग्र, संतुलित और जनकल्याणकारी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आया है। बजट में विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे को सुदुढ़ करने पर जोर दिया गया है।
उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक देहरा कमलेश ठाकुर और राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता को सलाम करते हुए बजट को जिला कांगड़ा के नवोत्थान का द्योतक बताया है। प्रदेश में वर्ष 2026-27 के लिए 54 हजार 928 करोड़ का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जिला कांगड़ा के प्रत्येक वर्ग के हितों की चिंता की है।
बजट में दुग्ध एवं पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देते हुए दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है तथा प्रतिदिन 2 लाख लीटर अतिरिक्त दूध संग्रहण क्षमता विकसित करने का प्रावधान किया गया है। बल्क मिल्क कूलर और दुग्ध संयंत्रों की स्थापना पर 65 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए दूध पर अनुदान बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि हिमफेड के माध्यम से गाय के दूध पर 6 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 30 करोड़ रुपये की लागत से पैस्टरोलिस्ट एंपावरमेंट योजना लागू की जाएगी।
कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में किसानों को राहत देते हुए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 40 रुपये बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा मक्का का एमएसपी 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के तहत हल्दी का एमएसपी 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। कृषि उत्पादों की खरीद, भंडारण और विपणन के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है तथा आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए हाइड्रोपोनिक्स सेंटर आॅफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
गद्दी, गुज्जर और अन्य संबधित समुदायों के 40 हजार से अधिक परिवारों के लिऐ 300 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ योजना आरंभ की जायेगी। बनखंडी में बन रहे जूलोजिकल पार्क के लिए बजट में 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बाल आश्रम गरली में भवन निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये की राशि आबंटित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही कांगड़ा जिला के धर्मशाला और बैजनाथ में 63 एमवीए के दो विद्युत उप केन्द्रों का निर्माण 221 करोड़ रुपये की लागत से किया जायेगा। मेडिकल काॅलेज टांडा में लेक्चर थियेटर निर्माण के लिए 14 करोड़ 86 लाख रुपये व काॅलेज के भवन के रख रखाव के लिए 2 करोड़ 27 लाख रुपये का प्रावधान किया जायेगा। इसके साथ ही नर्सिंग स्कूल के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया जाएगा। कांगड़ा हवाई अड्डे के समीप ऐरो सिटी नामक एक नए शहर को विकसित किया जायेगा।
वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वन पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन एवं आजीविका परियोजना के तहत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि एकीकृत विकास परियोजना के लिए वर्ष 2026-27 में 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2030 तक वन क्षेत्र में 32 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए दिव्यांगजनों की पेंशन 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। विधवा पुनर्विवाह योजना के तहत सहायता राशि 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है तथा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं का विस्तार किया जाएगा।
शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए 100 राजकीय विद्यालयों को सीबीएसई पैटर्न के अनुरूप विकसित किया जाएगा तथा 150 नए वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया जाएगा। उच्च शिक्षा में मल्टी एंट्री-एग्जिट प्रणाली, अकादमिक बैंक आॅफ क्रेडिट और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम लागू किए जाएंगे, जिससे छात्रों को अधिक लचीलापन और अवसर मिलेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण के तहत आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में पीईटी स्कैन और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एम्स बिलासपुर में 20 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल एंजियोग्राफी सुविधा स्थापित की जाएगी तथा विभिन्न अस्पतालों में आई.सी.यू. बेड और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
ऊर्जा एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में आरडीएसएस योजना के तहत 450 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा तथा 124 करोड़ रुपये की लागत से 220/132 केवी सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सौर ऊर्जा परियोजनाओं (11 मेगावाट, 8 मेगावाट, 10 मेगावाट और 5 मेगावाट) को विकसित किया जाएगा तथा जल शुद्धिकरण के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाएगा।
पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल आगंतुक पंजीकरण प्रणाली लागू किया जाएगा तथा 34.5 करोड़ रुपये की लागत से सतत पर्यटन विकास परियोजना शुरू किया जाएगा। ‘एच. पी. महिला पर्यटन कोष’ की स्थापना के माध्यम से महिलाओं को पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर प्रदान किए जाएंगे तथा कांगड़ा एयरोसिटी परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
युवा एवं खेल विकास के लिए 12 करोड़ रुपये की लागत से खेल अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा।
बुनियादी ढांचे के विकास के तहत पीएमजीएसवाई योजना में 200 करोड़ रुपये खर्च कर 800 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन किया जाएगा। साथ ही 1000 किलोमीटर नई सड़कों और पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। पेयजल क्षेत्र में 2000 करोड़ रुपये की लागत से नई योजनाएं शुरू की जाएंगी तथा 55 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
समग्र रूप से हिमाचल प्रदेश बजट 2026दृ27 राज्य के दीर्घकालिक विकास का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिसमें आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट राज्य को आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
















