Shimla/sidhivinayaktimes :- बंजार विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “असंतुलित, भेदभावपूर्ण और वास्तविकताओं से दूर” करार दिया है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट वक्तव्य भले ही अभूतपूर्व रूप से लंबा रहा हो और 100 से अधिक पृष्ठों में आंकड़ों का विस्तृत विवरण दिया गया हो, लेकिन उसमें बंजार विधानसभा क्षेत्र का कहीं कोई उल्लेख तक नहीं है। न कोई नई योजना, न कोई विशेष प्रावधान—यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार ने बंजार को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
विधायक ने आरोप लगाया कि यह बजट पूरे हिमाचल प्रदेश का न होकर चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित होकर रह गया है, जहां करोड़ों की परियोजनाओं की घोषणाएं की गई हैं। इसके विपरीत बंजार, जो भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण और विकास की दृष्टि से विशेष ध्यान का पात्र है, उसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया है।
हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बंजार विधानसभा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहा है। भारी जान-माल की क्षति, सैकड़ों परिवारों का विस्थापन और कई गांवों का अस्तित्व तक समाप्त हो जाना—ये तथ्य स्वयं सरकारी आंकड़ों में दर्ज हैं। इसके बावजूद बजट में न तो पुनर्वास के लिए कोई ठोस नीति दिखाई गई और न ही पीड़ितों के लिए कोई विशेष राहत पैकेज घोषित किया गया। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीनता को दर्शाती है।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग NH-305 का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह सड़क बंजार क्षेत्र की जीवनरेखा है, जिस पर लंबे समय से चर्चा और अपेक्षाएं जुड़ी रही हैं। किंतु इस बजट में इस महत्वपूर्ण परियोजना का जिक्र तक नहीं किया गया, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
पर्यटन क्षेत्र को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए विधायक ने कहा कि जहां अन्य क्षेत्रों में नए पर्यटन परिसरों और सुविधाओं की घोषणाएं की जा रही हैं, वहीं जीभी, सैंज और तीर्थन घाटी जैसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके पर्यटन स्थलों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के साथ अन्याय है, क्योंकि यहां की आजीविका का प्रमुख आधार ही पर्यटन है।
विधायक ने कहा कि यह केवल उपेक्षा नहीं, बल्कि बंजार को विकास की मुख्यधारा से पीछे धकेलने का प्रयास प्रतीत होता है। सड़क, पर्यटन और आपदा पुनर्वास जैसे मूलभूत मुद्दों पर सरकार की चुप्पी अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने बजट के समग्र स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न तो आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है, न ही टिकाऊ विकास का रोडमैप प्रस्तुत करता है और न ही प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
अंत में विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“यह बजट विकास का नहीं, बल्कि कर्ज, भ्रम और खोखली घोषणाओं का दस्तावेज़ है। इसमें समस्याओं का उल्लेख तो है, पर समाधान का अभाव है।”
विधायक ने इस बजट का दृढ़तापूर्वक विरोध करते हुए सरकार से मांग की कि बंजार विधानसभा क्षेत्र के साथ हो रहे इस भेदभाव को तुरंत समाप्त किया जाए और क्षेत्र के लिए ठोस, समयबद्ध एवं प्रभावी विकास योजनाएं लाई जाएं।


















