सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। चंडीगढ़ में युवाओं को रोजगार से जोड़ने और कौशल विकास को रोजगार मांग के अनुरूप बेहतर बनाने के उद्देश्य से पंजाब विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीएसडीई) के नेतृत्व में स्किल-गैप मैपिंग परियोजना की एक कार्यशाला आयोजित की गई। यह पहल नीति आयोग के सहयोग से चल रही परियोजना के तहत की जा रही है, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन ने सीएसडीई को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है। कार्यशाला में प्रशासन के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और पूर्व छात्र शामिल हुए और उन्होंने मिलकर यह चर्चा की कि किन क्षेत्रों में युवाओं के लिए कौशल की कमी है और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कैसे आधुनिक रोजगार बाजार के अनुरूप ढाला जा सकता है। कार्यशाला की अध्यक्षता यूटी वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा ने की, जिन्होंने कहा कि तेजी से बदलते रोजगार क्षेत्र और नई तकनीकों के चलते स्किलिंग कार्यक्रमों को नियमित रूप से अपडेट करना आवश्यक है। उद्घाटन सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय की रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की निदेशक प्रो. मीनाक्षी गोयल ने कहा कि मजबूत शोध, जिम्मेदारी और संस्थागत तालमेल के बिना प्रभावी कौशल नीति संभव नहीं है।
यह भी पढ़ें:https://sidhivinayaktimes.com/rdg-noevolution-increased-for-himachalanurag-singh-thakur/
परियोजना की प्रमुख शोधकर्ता प्रो. सुवीरा गिल ने बताया कि इस अध्ययन के निष्कर्ष सरकारी नीतियों, प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता वृद्धि और रोजगार बाजार के साथ बेहतर समन्वय के लिए उपयोग किए जाएंगे। कार्यशाला में ड्रीम अहेड टेक प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक आशीष श्रीवास्तव ने स्किल-गैप मैपिंग टूल का लाइव प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य, बैंकिंग, हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में कौशल अंतर, संस्थागत चुनौतियाँ तथा डेटा के सही उपयोग पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने सॉफ्ट स्किल्स, कार्य संस्कृति और जॉब रेडीनेस को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। अंत में यह निर्णय लिया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन, उद्योग, सीएसडीई और प्रशिक्षण संस्थान मिलकर अध्ययन के निष्कर्षों को लागू करेंगे, ताकि पाठ्यक्रमों में सुधार, प्रशिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने और रोजगार आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जा सके।





















