नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। 16वें भारत- यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते की संयुक्त घोषणा की। इसे भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ी और अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
एफटीए के तहत भारत को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत और यूरोपीय संघ दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और दोनों मिलकर वैश्विक जीडीपी का बड़ा हिस्सा रखते हैं। ऐसे में यह साझेदारी न सिर्फ आपसी व्यापार को बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत बनाएगी।
इस एफटीए के तहत भारत को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। यूरोपीय संघ ने अधिकांश भारतीय उत्पादों को अपने बाजार में आसान प्रवेश देने का फैसला किया है। इससे कपड़ा, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा। अनुमान है कि इस समझौते से भारत के निर्यात में अरबों डॉलर की बढ़ोतरी होगी और कई उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में भी कमी आएगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की आर्थिक नीति की बड़ी सफलता बताया। उनके अनुसार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे छोटे उद्योगों, महिलाओं, कारीगरों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी इस समझौते का असर दिखेगा। यूरोप की कंपनियां भारत में नई तकनीक वाले वाहन ला सकेंगी और भारत में बने वाहनों को यूरोपीय बाजार में जगह मिलेगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर और आधुनिक विकल्प मिलेंगे।
आईटी, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, पर्यटन और कई क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भी इस समझौते से फायदा होगा। चाय, कॉफी, मसाले, फल, सब्जियां और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात में बढ़ोतरी से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही भारत ने डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है।
सेवा क्षेत्र इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आईटी, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए विदेश में काम करने के रास्ते भी आसान होंगे, जिससे ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ेगा। पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते में विशेष प्रावधान किए गए हैं। तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता के जरिए भारत को नई पर्यावरणीय जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा अधिकार, स्वच्छ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग इस समझौते को भविष्य के लिए उपयोगी बनाता है। इससे भारत की तकनीकी ताकत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। कुल मिलाकर, भारत- यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दोनों के लिए एक नए दौर की शुरुआत है। यह व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा और भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करेगा। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





















