शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और पुलिस थानों में जमा अनुपयोगी सामान (स्क्रैप) को हटाने और उसके सही प्रबंधन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार अब हर साल स्क्रैप को खत्म करने के लिए एक विशेष योजना लाएगी ताकि सरकारी परिसरों में जगह खाली हो सके और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
विधायक केवल सिंह पठानिया ने उठाया मुद्दा
चर्चा की शुरुआत करते हुए विधायक केवल सिंह पठानिया ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को एक प्रभावी ‘स्क्रैप नीति’ (Scrap Policy) तैयार करनी चाहिए। उन्होंने ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों, थानों और अस्पतालों में सालों से पुरानी मशीनें, टूटे फर्नीचर और गाड़ियाँ कबाड़ के रूप में पड़ी हुई हैं। इससे न केवल कीमती जगह घिरती है, बल्कि संस्थानों का सौंदर्य और स्वच्छता भी प्रभावित होती है।
चर्चा की शुरुआत करते हुए विधायक केवल सिंह पठानिया ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को एक प्रभावी ‘स्क्रैप नीति’ (Scrap Policy) तैयार करनी चाहिए। उन्होंने ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों, थानों और अस्पतालों में सालों से पुरानी मशीनें, टूटे फर्नीचर और गाड़ियाँ कबाड़ के रूप में पड़ी हुई हैं। इससे न केवल कीमती जगह घिरती है, बल्कि संस्थानों का सौंदर्य और स्वच्छता भी प्रभावित होती है।
विक्रमादित्य सिंह का आश्वासन
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक गंभीर विषय है जो लगभग हर सरकारी विभाग से जुड़ा है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान में उद्योग विभाग इस मामले को देख रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कबाड़ के वैज्ञानिक और पारदर्शी निपटान के लिए जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक गंभीर विषय है जो लगभग हर सरकारी विभाग से जुड़ा है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि वर्तमान में उद्योग विभाग इस मामले को देख रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कबाड़ के वैज्ञानिक और पारदर्शी निपटान के लिए जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: हर साल होगी सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप किया और एक नई नीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों में अनावश्यक वस्तुओं के जमा होने से कार्यप्रणाली में बाधा आती है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार अब प्रतिवर्ष एक विशेष योजना लागू करेगी, जिसके तहत सभी विभागों को अपने यहाँ पड़े स्क्रैप की पहचान कर उसे समयबद्ध तरीके से निपटाना होगा। इससे न केवल सरकारी खजाने में राजस्व आएगा, बल्कि परिसरों का रखरखाव भी बेहतर होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप किया और एक नई नीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों में अनावश्यक वस्तुओं के जमा होने से कार्यप्रणाली में बाधा आती है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार अब प्रतिवर्ष एक विशेष योजना लागू करेगी, जिसके तहत सभी विभागों को अपने यहाँ पड़े स्क्रैप की पहचान कर उसे समयबद्ध तरीके से निपटाना होगा। इससे न केवल सरकारी खजाने में राजस्व आएगा, बल्कि परिसरों का रखरखाव भी बेहतर होगा।



















