नई दिल्ली: सरकार ने कहा है कि इंटरनेट पर फैल रही फेक न्यूज़ को रोकना जरूरी है, लेकिन साथ ही लोगों की बोलने और लिखने की आज़ादी भी बनी रहनी चाहिए। राज्यसभा में बताया गया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बढ़ती गलत खबरों को देखते हुए सरकार ने 2021 में नए नियम बनाए थे। इन नियमों का मकसद है इंटरनेट पर डाली जाने वाली सामग्री को जिम्मेदारी से प्रकाशित करना और फेक न्यूज़ को रोकना।
ओटीटी और ऑनलाइन कंटेंट के लिए नियम
- ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म किसी भी ऐसी सामग्री को नहीं दिखा सकते जो कानून के खिलाफ हो।
- उन्हें अपनी सामग्री को पाँच उम्र-आधारित श्रेणियों में बाँटना होगा।
- बच्चों को गलत या हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
न्यूज़ वेबसाइटों के लिए नियम
- उन्हें सच्ची, सही और पूरी खबरें दिखानी होंगी।
- गलत, भ्रामक या अधूरी जानकारी दिखाने की अनुमति नहीं है।
- उन्हें पहले से बने मीडिया आचार संहिता का पालन करना होगा।
शिकायत निवारण की तीन-स्तरीय व्यवस्था
1. पहला स्तर: प्लेटफ़ॉर्म खुद शिकायत का समाधान करेगा
2. दूसरा स्तर: प्लेटफ़ॉर्म की अपनी स्व-नियामक संस्था
3. तीसरा स्तर: सरकार की निगरानी
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था प्रेस की स्वतंत्रता भी बनाए रखती है और गलत जानकारी रोकने में भी मदद करती है।
सोशल मीडिया पर नियम
फेसबुक, यूट्यूब जैसी साइटों पर भी गलत जानकारी फैलने से रोकने के लिए नियम बनाए गए हैं।
फैक्ट चेक यूनिट
2019 में सरकार ने एक फैक्ट चेक यूनिट बनाई, जो सरकार से जुड़ी फेक न्यूज़ की जांच कर सही जानकारी बताती है। जरूरत पड़ने पर सरकार गलत पोस्ट या वेबसाइट को ब्लॉक भी कर सकती है।
क्रिएटर इकॉनमी को बढ़ावा
सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनसे कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स को अपना काम दिखाने, पहचान पाने और कमाई करने का मौका मिल रहा है। WAVES (World Audio Visual & Entertainment Summit) OTT जैसे प्लेटफ़ॉर्म उन्हें अपनी सामग्री अपलोड करने और उससे कमाने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर, सरकार डिजिटल दुनिया को सुरक्षित, भरोसेमंद और रचनात्मक बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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