100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के अंतर्गत आज जिला कांगड़ा के धर्मशाला में आयुष अधिकारियों एवं चिकित्सकों के लिए एक भव्य जिला स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला के सभागार में किया गया, जहाँ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आयुष अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक सशक्त, प्रभावी एवं जनभागीदारी आधारित बनाना तथा आयुष विभाग की भूमिका को अभियान में और अधिक सक्रिय एवं मजबूत करना रहा।
कार्यशाला के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार सूद ने विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से जिला कांगड़ा में टीबी उन्मूलन के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों, उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी रणनीतियों की विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक जनआंदोलन है, जिसमें प्रत्येक विभाग, प्रत्येक संस्था, प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी तथा समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी मुक्त जिला, टीबी मुक्त हिमाचल और टीबी मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक सहयोग, सामुदायिक सहभागिता, पोषण समर्थन, समय पर पहचान, शीघ्र उपचार आरंभ तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने आयुष चिकित्सकों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में टीबी के लक्षणों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, संदिग्ध रोगियों की शीघ्र पहचान करने, उपचाराधीन मरीजों को परामर्श देने तथा निक्षय मित्र पहल के माध्यम से मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध करवाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि आयुष विभाग द्वारा टीबी उन्मूलन अभियान में दिया जा रहा सहयोग अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायक है। आयुष चिकित्सक समाज के अंतिम छोर तक पहुंच रखने वाले ऐसे स्वास्थ्य स्तंभ हैं, जिनकी भूमिका ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के दौरान आयुष विभाग की भागीदारी न केवल रोग की शीघ्र पहचान में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि उपचार अनुपालन, परामर्श, सामुदायिक विश्वास निर्माण एवं सामाजिक समर्थन को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायक उपलब्धि यह रही कि 200 से अधिक आयुष चिकित्सकों एवं अधिकारियों ने निक्षय मित्र पहल से जुड़ते हुए स्वयं को निक्षय मित्र के रूप में पंजीकृत किया तथा टीबी मरीजों को पोषण सहायता एवं मानवीय सहयोग प्रदान करने के लिए अपनी सशक्त प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह पहल न केवल मरीजों के लिए पोषण सहयोग सुनिश्चित करेगी, बल्कि समाज में यह संदेश भी देगी कि टीबी मरीज अकेला नहीं है–समाज, विभाग और व्यवस्था उसके साथ खड़ी है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक करोल एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. ब्रिज नंदन शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभागीय समन्वय, सामुदायिक जागरूकता, बहु-क्षेत्रीय सहयोग और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आयुष विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने, संभावित मरीजों की पहचान करने, निक्षय पोर्टल से जुड़ाव बढ़ाने तथा निक्षय मित्र अभियान को जनआंदोलन का रूप देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से डॉ. निकेत तथा राज्य स्तर पर द यूनियन के कंसलटेंट श्री सुनील सविता ने भी सहभागिता की। उन्होंने टीबी नियंत्रण एवं उन्मूलन से संबंधित तकनीकी पहलुओं, राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों, सामुदायिक भागीदारी, निजी एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय तथा मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था, आयुष चिकित्सक, सामुदायिक कार्यकर्ता एवं नागरिक अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाए, तो टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निश्चित रूप से शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यशाला में लगभग 200 आयुष चिकित्सकों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा टीबी उन्मूलन के लिए अपने योगदान को और अधिक मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने अभियान के उद्देश्यों, रणनीतियों एवं क्षेत्रीय कार्ययोजना को गंभीरता से समझा तथा अपने-अपने कार्यक्षेत्र में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का भरोसा दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी आयुष अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने सामूहिक रूप से निक्षय शपथ ग्रहण की और टीबी मुक्त जिला, टीबी मुक्त हिमाचल तथा टीबी मुक्त भारत के संकल्प को अपने कार्यक्षेत्र में पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का वचन लिया।
यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक सशक्त, प्रेरणादायक और परिणामोन्मुख पहल सिद्ध हुई। जिला कांगड़ा में आयुष विभाग, स्वास्थ्य विभाग, तकनीकी साझेदारों एवं समाज की संयुक्त भागीदारी यह दर्शाती है कि Yes! We Can End TB केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रतिबद्धता है।
जिला कांगड़ा ने इस कार्यशाला के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जब सभी विभाग, सभी स्वास्थ्यकर्मी और समाज एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब टीबी जैसी चुनौतीपूर्ण बीमारी को भी हराया जा सकता है।




















